कोटा कलम में साकार हुईं माँ कात्यायनी, स्वर्णिम आभा और पारंपरिक कला का अद्भुत संगम
पत्थर और स्वर्ण रंगों के साथ सोने के वर्क से सजी हस्तनिर्मित पेंटिंग, चार दिन में कलाकार ने किया तैयार
चित्रकार शंभू सिंह चौबदार
कोटा। भारतीय संस्कृति में नवरात्रि का पर्व शक्ति की आराधना और भक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्त्व को कोटा की पारंपरिक चित्रकला शैली कोटा कलम के माध्यम से खूबसूरती से उकेरा गया है। माँ कात्यायनी की यह हस्तनिर्मित पेंटिंग अपनी स्वर्णिम आभा, पारंपरिक रंगों और बारीक कलात्मक कार्य के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है।
माँ कात्यायनी के दिव्य स्वरूप का चित्रण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कात्यायनी अपने भक्तों के दुख-दर्द दूर करने वाली और उन्हें शक्ति, साहस एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाली देवी हैं। देवी के इस स्वरूप की आराधना विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। महर्षि कात्यायन से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। उनके स्वरूप को दिव्यता, तेज और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
स्वर्णिम रंगों से निखरी कोटा कलम की कला
इस पेंटिंग में माँ कात्यायनी के दिव्य स्वरूप को पीले, स्वर्णिम और पत्थर से प्राप्त प्राकृतिक रंगों के माध्यम से उभारा गया है। सोने के वर्क का बारीकी से किया गया प्रयोग चित्र को विशेष चमक और भव्यता प्रदान करता है। पारंपरिक चित्रकला की तकनीकों से तैयार यह कलाकृति भारतीय धार्मिक आस्था और हाड़ौती की समृद्ध कला परंपरा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
चार दिन में तैयार हुई हस्तनिर्मित पेंटिंग
माँ कात्यायनी की इस पेंटिंग को हस्तनिर्मित बसली पर तैयार किया गया है। इसे बनाने में लगभग चार दिन का समय लगा। चित्र में रंगों के संयोजन, बारीक रेखांकन और स्वर्णिम सज्जा के माध्यम से देवी के स्वरूप को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह कलाकृति दर्शाती है कि पारंपरिक चित्रकला केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और कलाकार की सूक्ष्म दृष्टि का भी परिणाम है।
कोटा कलम की ऐसी कलाकृतियाँ धार्मिक विषयों को स्थानीय कला परंपरा से जोड़ते हुए हाड़ौती की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माँ कात्यायनी की यह पेंटिंग आस्था, सौंदर्य और पारंपरिक चित्रकला का ऐसा संगम है, जिसमें देवी के दिव्य स्वरूप के साथ कोटा की कलात्मक पहचान भी झलकती है।





