कोटा/बूँदी 14 अक्टूबर। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को कोटा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र में अवैध बजरी खनन एवं संकटग्रस्त जलीय जीवों के लिए खतरे से संबंधित प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेशों की अनुपालना में कोटा-बूंदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन की प्रभावी रोकथाम के लिए अभी तक उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए अवैध बजरी खनन रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने एवं सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध खनन वाले संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करें एवं वहां लगातार पेट्रोलिंग की जाए। अवैध बजरी परिवहन करने वाले वाहनों के मार्गों को चिन्हित कर मोबाइल चौकी स्थापित करें एवं लगातार चैकिंग कर कार्रवाई करें। उन्होंने घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन एवं परिवहन के मामलों में पिछले वर्ष की गई कार्रवाई, वन विभाग, खान विभाग एवं पुलिस की ज्वॉइंट पेट्रोलिंग, जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठकों आदि के बारे में जानकारी ली। अवैध बजरी खनन के खिलाफ की गई सभी कार्रवाईयों की विभागवार समीक्षा करते हुए उन्होंने कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन, पुलिस, खनन विभाग एवं वन विभाग द्वारा अवैध खनन की रोकथाम को लेकर किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा कर निर्देश दिए कि अवैध बजरी खनन में प्रयुक्त होने वाले वाहनों को जब्त करने के लिए संवेदनशील स्थानों पर मोबाइल चेक पोस्ट की स्थापना की जाए। वन विभाग, पुलिस एवं खान विभाग द्वारा समन्वय स्थापित कर नियमित रूप से इन सभी क्षेत्रों में आवश्यक रूप से पेट्रोलिंग की जाए। सभी संबंधित विभाग संयुक्त रूप से गश्त कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने, अवैध खनन वाले गांवों में मुखबिर तैयार करने तथा सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए।
आईजी कोटा रेंज हरेन्द्र महावर ने बताया कि सीसीएफ कोटा एवं सीसीएफ वाइल्ड लाइफ कोटा के साथ 13 अक्टूबर को घघटाना, कोटसुवां एवं मानसगांव में निरीक्षण किया गया था। डीसीएफ रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व श्री अरुण कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि 10 अक्टूबर को फील्ड डायरेक्टर, आरवीटीआर के निर्देशन में डोलार, रोडगंज एवं नोताडा में फील्ड विजिट किया गया। उन्होंने बताया कि संवेदनशील चेक पोस्ट पर बोर्डर होमगार्ड लगाए गए हैं। अवैध खनन पर निगरानी के लिए होमगार्ड को वेपन एवं बॉडी कैम दिए गए हैं। साथ ही, 14 वायरलेस सेट, एक थर्मल ड्रोन एवं अन्य उपकरणों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बूंदी के केशोरायपाटन, लाखेरी एवं इंदरगढ़ थाने के प्रभारी एवं पुलिस कर्मियों को साथ लेकर वन एवं खान विभाग के अधिकारियों द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जा रही है।
डीसीएफ रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व ने बताया कि बूंदी जिले में 1 अप्रेल से अभी तक अवैध बजरी खनन के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए आरवीटीआर क्षेत्र में अवैध खनन के 12 प्रकरण वन विभाग द्वारा दर्ज करते हुए अवैध बजरी परिवहन कर रहे 7 वाहन जब्त किए गए। परिवहन विभाग द्वारा 148 मामलों में कार्रवाई करते हुए 28 वाहन जब्त किए गए। पुलिस एवं खान विभाग द्वारा 25 मामलों में कार्रवाई करते हुए 44 वाहन जब्त किए गए। इसी प्रकार कोटा जिले में आरवीटीआर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा 20 प्रकरण दर्ज करते हुए 18 वाहन जब्त किए गए। पुलिस विभाग द्वारा कोटा में 11 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 9 वाहन जब्त किए गए एवं 4 को गिरफ्तार किया गया। माइंस विभाग द्वारा 8 प्रकरणों में कार्रवाई की गई।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भारी वाहनों, जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों आदि में आवश्यक रूप से जीपीएस सिस्टम लगा होना चाहिए। साथ ही, जीपीएस सिस्टम की नियमित रूप से सघन मॉनिटरिंग की जाए, ताकि घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र में अवैध खनन में प्रयुक्त होने वाले सभी वाहनों की जानकारी मिल सके। उन्होंने जिला रसद अधिकारी को निर्देश दिए कि बिना रजिस्ट्रेशन प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल पम्प से ईंधन उपलब्ध नहीं हो, इसकी सख्त मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पम्प पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की फीड चेक कर इस तरह के वाहनों की सूची बनाकर कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक बजरी के प्रभावी विकल्प के रूप में एम-सेण्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए आमजन में जागरूकता बढ़ाई जाए। अवैध खनन व इसके परिवहन की प्रभावी रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए। खान विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि कोटा जिले में एम-सेण्ड की 9 यूनिट जबकि बूंदी जिले में 4 यूनिट संचालित हैं। कोटा जिले में 3 और यूनिट दिसंबर माह तक शुरू हो जाएंगी जिससे एम-सेण्ड की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी एवं मकान निर्माण में बजरी पर निर्भरता कम होगी।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरुण प्रसाद, संभागीय आयुक्त एवं जिला कलक्टर कोटा पीयूष समारिया, सीसीएफ वाइल्ड लाइफ कोटा टी. मोहनराज, जिला कलक्टर बूंदी हरफूल सिंह यादव, पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौतम, कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर, बूंदी एसपी अवनीश कुमार शर्मा, डीसीएफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व मुथु एस., डीसीएफ कोटा यादवेन्द्र सिंह, एडीएम प्रशासन राजेश जोशी सहित खान, परिवहन, पुलिस एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।







