कुंभकारी कला को बचाने की पहल, प्रबुद्धजनों को निशुल्क बांटे जाएंगे दीपक; मेहनत के बावजूद उचित मेहनताना नहीं मिलने से नई पीढ़ी बना रही दूरी
कोटा 15 अक्टूबर। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और विलुप्त होती कुंभकारी कला को बचाने के लिए समाजसेवी डॉ. दुर्गा शंकर सैनी ने अनूठी पहल की है। खाई रोड स्थित कुंभकार के घर पहुंचकर उन्होंने केसरिया, सफेद और हरे रंग के करीब 5100 मिट्टी के दीपक बनवाए। इन दीपकों को लोगों को निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। डॉ. सैनी ने बताया कि कुंभकारी कला लगातार विलुप्त होती जा रही है। इस काम में काफी मेहनत लगती है, लेकिन उचित मेहनताना नहीं मिलने के कारण नई पीढ़ी इससे दूरी बना रही है।
कुंभकार रामकुमार प्रजापति ने बताया कि दीपक बनाने के लिए दूर से मिट्टी लानी पड़ती है। इसके बाद मिट्टी को छानकर तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि 1000 दीपक बनाने में करीब तीन दिन का समय लगता है। मेहनत अधिक होने और कम कमाई के कारण युवा इस पारंपरिक व्यवसाय को अपनाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। डॉ दुर्गा शंकर सैनी ने बताया कि करीब 12 साल से इस पहल को चला रहे हैं इसका उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ पारंपरिक कला और कुंभकारों की आजीविका को संरक्षण देना है।








