Sunday, April 19, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

ग़ज़ल- हाथ उसके बड़ा अनमोल गुहर आ जाये-शकूर अनवर

ग़ज़ल

हाथ उसके बड़ा अनमोल गुहर* आ जाये।

जिसको इस दौर में जीने का हुनर आ जाये।।

*

जिसकी मंज़िल पे मुहब्बत के दीए जलते हों।

ज़िन्दगी में कोई ऐसा भी सफ़र आ जाये।।

*

कितना मुश्किल है कड़ी धूप में तन्हा चलना।

काश आ जाए तेरी राहगुज़र* आ जाये।।

*

काश पढ़ले वो सितमगर* मेरे चेहरे की किताब।

काश उसको भी मेरा दर्द नज़र आ जाये।।

*

सालहा- साल* के मंसूबे* बनाने वाले।

कौन कह सकता है तू शाम को घर आ जाये।।

*

क़ाफ़िला अब मेरा मंज़िल पे रुकेगा “अनवर”।

अब ये ख़्वाइश* नहीं रस्ते में शजर आ जाये।।

*

शब्दार्थ:-

गुहर*मोती

राहगुज़र*रास्ता

सितमगर*ज़ुल्म करने वाला, प्रेमिका

सालहा-साल*कई साल

मंसूबे*योजनाऍं

ख़्वाइश* इच्छा

शजर*पेड़

*

✍शकूर अनवर

📞9460851271

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles