गर्मी पड़े़ घणी साजन फले फुले केसुला फुल !मांड धुंन
मेरी पसंद की मांड
केसरिया बालम पधारो नी म्हारे देश
राजस्थानी गीतों की प्रसिद्ध लोक गायिका
सीमा मिश्रा जी की आवाज में सुन रहा था उनकी आवाज में पहले भी बराबर सुनता रहा हूं
जगदीश आकाश
मांड केसरिया बालम पधारो म्हारे देश की तर्ज पर कॉपीराइट जगदीश आकाश बिना परमिशन इसका व्यवसायिक प्रयोग वर्जित
कानूनन शब्दों का हेर
फेर
बिना लेखक की आज्ञा के कानूनन असंवैधानिक।
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गर्मी पड़े घणी साजन! फले फुले केसुला फुल !
म्हू तड़पु थारी याद में, साजन कस्यां गया भुल !
केसरिया बालम याद सतावे
ओऴयु घणी आवे
जिवडो़ घणो घबरावे !.
कदी पधारोला मारे देश
दरवाजा की साकऴ हाले ! चर चर बोले चुल !
रोटियां नी भावे
याद सतावे, जिवडो़ घणो घबरावे, हिया उठे शूऴ
गर्मी घणी पड़े साजन !! फले फुले केसुला फुल
सावन बितयो ,फागण गयो
या गर्मी तो प्राण लेवे !
एक तो गर्मी, दूजी याद, तिजी हीया उठे शुऴ,
घर से गऴी , गऴी सूं घर ,वेडी गेली बोले गांव !
केसरिया बालम याद सतावे !
जगदीश आकाश वेंडिंया !
थु कस्यौ गयो मने भुल।
गर्मी घणी पड़े फले फुले कैसुला फुंल !
धड़क धडक काऴजो
छूटे सांसा जाणे कदी ?
थुं नहीं आयो !
रिती सांसां आवे जावे !
याद सतावे जीवडो़ घणो घबरावे,हिया उठे शुऴ
गर्मी पड़े घणी साजन फले फुले केसुला फुल !.
मुं तड़पू थारी याद में जगदीश्या काश गयो भुल !
कॉपीराइट जगदीश आकाश
स्वर के लिए संपर्क करें
छगन जाट, नारायण सेवा संस्थान, रामदयाल मेहरा राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर राजस्थान भारत 94 60 88 322
तावड़को घणो पडिरयो बापू ध्यान राख जो डील रो
डील का मतलब शरीर
तावड़का का मतलब धूप
जगदीश आकाश जय श्री कृष्णा
जगदीश आकाश के नाम से घूंघट में गोरी के चित्र के साथ उपरोक्त राजस्थानी मांड
जगदीश आकाश




