Saturday, August 22, 2026
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रिश्तों की EMI: समय पर चुकाएं, ब्याज न बढ़ने दें -संवाद ही है रिश्तों की किस्त – परमानन्द गोयल 

 लेखक -परमानन्द गोयल

 होम लोन की किस्त दो महीने लेट हो जाए, तो बैंक के नोटिस और घर नीलाम होने के डर से हम दोस्तों से उधार लेकर भी किस्त भर देते हैं। अजीब बात है कि जिस मकान को ‘घर’ बनाने वाले रिश्तों की किस्तें हम सालों-साल लेट कर देते हैं, वहां हमें कोई डर नहीं लगता। हमें लगता है ये रिश्ते तो ‘फ्रीहोल्ड’ हैं, कहीं नहीं जाएंगे। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है। रिश्ते भी EMI पर ही चलते हैं; फर्क सिर्फ इतना है कि बैंक की EMI पैसों से चुकती है और रिश्तों की EMI भावनाओं से।

क्या है रिश्तों की किस्त?

रिश्तों की किस्त कोई बहुत बड़ा त्याग नहीं, बल्कि रोज की छोटी-छोटी अदायगी है।

मां की किस्त: दो मिनट रुककर उनकी दवा के बारे में पूछ लेना।

पिता की किस्त: बिना सलाह मांगे, उनकी बात को बीच में न काटना।

जीवनसाथी की किस्त: दिनभर की थकान के बाद भी पांच मिनट आंखें मिलाकर बात कर लेना।

बच्चे की किस्त: उसका होमवर्क नहीं, बल्कि उसका दिन कैसा गया, यह जानना।

दोस्त की किस्त: बिना किसी काम के, सिर्फ ‘कहाँ है तू?’ का एक संदेश भेज देना।

ये किस्तें महंगी नहीं होतीं, इन्हें बस समय की दरकार होती है।

जब किस्त बाउंस होती है…

रिश्तों का बैंक तुरंत पेनल्टी नहीं लगाता, वह इंतजार करता है। पहली बार किस्त चूकने पर सामने वाला नाराज होता है, दूसरी बार शिकायत करता है और तीसरी बार वह चुप हो जाता है। जिस दिन वह चुप हो गया, समझ लीजिए भारी ब्याज लगना शुरू हो गया।

यह ब्याज गुस्से के रूप में नहीं, बल्कि दूरी के रूप में वसूल होता है। फिर एक ही छत के नीचे रहते हुए भी लोग अजनबी हो जाते हैं। किसी दिन एक छोटी सी बात पर होने वाला बड़ा विस्फोट असल में उस एक बात पर नहीं होता, बल्कि वह उन तमाम बाउंस हुई किस्तों के एकत्रित ब्याज का हिसाब होता है। हम करियर और 30 साल का लोन भरकर मकान तो खरीद लेते हैं, पर उस घर में हंसने वाले लोग खो देते हैं।

रिश्तों का ‘सिबिल स्कोर’ कभी खराब नहीं होता-

रिश्तों की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां ‘CIBIL स्कोर’ स्थायी रूप से खराब नहीं होता। आपकी एक सच्ची कोशिश सारा पुराना ब्याज माफ करवा सकती है। आज ही किसी एक बकाया किस्त को चुकाकर देखिए। पिता को फोन कर पूछिए- ‘खाना खाया?’, दोस्त को संदेश भेजिए- ‘चलो चाय पीते हैं’ और बच्चे से कहिए- ‘मुझे तुम पर गर्व है।’

याद रखिए, बैंक का लोन तो 20 साल में खत्म हो जाता है, पर रिश्तों की EMI जिंदगीभर चलती है। इसे ‘NPA’ (डिफॉल्ट) मत होने दीजिए। जब जीवन की शाम आएगी, तब बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि यही समय पर चुकाई हुई किस्तें सुकून बनकर आपको गले लगाएंगी।

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