Tuesday, October 13, 2026
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कोटा के डॉ. अनीश गुप्ता ने चीन में बढ़ाया भारत का मान, शोधपत्र को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

भारत सिंह चौहान

कोटा। राजस्थान के कोटा शहर के प्रतिष्ठित एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ, आयुर्वेद चिकित्सक एवं शोधकर्ता डॉ. अनीश गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का गौरव बढ़ाया है। चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सम्मेलन में उन्होंने अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया, जिसे उत्कृष्टता के लिए “बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।

डॉ. गुप्ता को चीन सरकार के प्रतिष्ठित संस्थान चाइना एकेडमी ऑफ चाइनीज मेडिकल साइंसेज (CACMS), बीजिंग द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने “द ब्रिज बिटवीन आयुर्वेद एंड ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन: ए शेयर्ड जर्नी ऑफ विजडम” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया।

अपने शोध में उन्होंने आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी चिकित्सा (टीसीएम) के साझा सिद्धांतों, दोनों चिकित्सा प्रणालियों की वैज्ञानिक उपयोगिता तथा वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में उनके समन्वय की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत और चीन की हजारों वर्षों पुरानी चिकित्सा परंपराएं आज भी समग्र स्वास्थ्य एवं रोग निवारण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

डॉ. गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में दोनों देशों की चिकित्सा पद्धतियों के अनुभवों और ज्ञान को एकीकृत कर विश्व मानवता के लिए अधिक प्रभावी एवं समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके शोधकार्य की गुणवत्ता और विषय की प्रासंगिकता को देखते हुए संस्थान के निदेशक प्रोफेसर डॉ. रोंग पेजिंग ने उन्हें “बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवॉर्ड” प्रदान किया।

डॉ. अनीश गुप्ता पिछले तीन दशकों से अधिक समय से एक्यूपंक्चर एवं आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने देशभर में दो लाख से अधिक रोगियों का उपचार किया है तथा अनेक जटिल रोगों पर शोध एवं चिकित्सा कार्य किया है। वर्तमान में वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एक्यूपंक्चर रिसर्च एंड एलाइड साइंसेज, कोटा के निदेशक एवं प्राचार्य हैं तथा एक्यूपंक्चर साइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

डॉ. गुप्ता की यह उपलब्धि न केवल कोटा और राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की प्रतिष्ठा को नई पहचान मिली है।

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