गर है रास्ता मुश्क़िल तो आसान बना
तू कमज़ोर है तो खुद को बलवान बना
मेहनत से मिले तू उसका पकवान बना
तू करके जी हुजूरी ना सम्मान बना
छोटा सा ही चाहे अपना मकान बना
तू धरा को ही खुद अपना आसमान बना
जो बिक सके ना कभी ऐसा ईमान बना
रिश्वतखोरी से न तू अपनी शान बना
सभी के दिल में तू अपना स्थान बना
मतलब की झूठी ना तू पहचान बना
अपना किसी गरीब को तू मेहमान बना
पैरों तले दबाके ना पायदान बना
तू पहले खुद ही को तो इन्सान बना
औरों को दिखा तर्जनी ना हैवान बना
जो तेरे हर गुनाह पे भी रहमान बना
है रब वो जाने सब उसको ही राज़दान बना
बदलेगा वक्त तू खुदको धैर्यवान बना
आगे बढ़ कर कल का हिन्दुस्तान बना
ना हिंदू सिख ईसाई मुस्लमान बना
अपनी इंसानियत को तू भगवान बना
“क़लन्दर”





