कोटा। नेशनल कांग्रेस वर्कर्स कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष हाड़ौती के वरिष्ठ समाजसेवी आबिद खान ने ईद-उल-फितर के अवसर पर संदेश जारी करते हुए कहा कि यह पर्व सभी समुदायों को गले लगाकर साथ चलने की सीख देता है। उन्होंने बताया कि जश्न-ए-ईद पवित्र रमजान महीने के उपवास के बाद मनाया जाता है, जिसमें 1 से 30 रोजे रखकर इंसान अपने ईश्वर के करीब होता है।
आबिद खान ने कहा कि रमजान और ईद का असली महत्व संयम, सेवा और आपसी भाईचारे में निहित है। इस दौरान सभी समुदायों के लोगों को साथ लेकर चलना और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखना ही इस पर्व का मुख्य संदेश है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने भी सभी समुदायों को साथ लेकर चलने और उनकी सेवा करने का संदेश दिया, जिससे लोगों ने उन्हें अपना मार्गदर्शक माना। ईद का पर्व इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आपसी प्रेम और सौहार्द को मजबूत करता है।
आबिद खान ने बताया कि ईद-उल-फितर को क्षमा और मिलन का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं, मीठी सेवइयों के साथ खुशियां बांटते हैं और मधुर वाणी में एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यही आपसी भाईचारा और सुकून इस त्योहार की असली पहचान है।






