Wednesday, October 21, 2026
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ब्रह्माकुमारी केंद्र पर धूमधाम से मनाई विजयादशमी, बुराइयों रूपी रावण का किया दहन

ब्रह्माकुमारी केंद्र पर धूमधाम से मनाई विजयादशमी, बुराइयों रूपी रावण का किया दहन

कॉमेडियन अटरू वाले फूफाजी ने हास्य कला से गुदगुदाया, पार्षद रेहाना अंसारी ने कहा— निःस्वार्थ प्रेम देखना हो तो ब्रह्माकुमारी केंद्र जरूर आएं

कोटा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शक्ति सरोवर कमला उद्यान, कुन्हाड़ी केंद्र पर मंगलवार को विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कॉमेडियन गोपाल सिंह सोलंकी उर्फ अटरू वाले फूफाजी तथा वार्ड 82 की पार्षद रेहाना अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों को सेवा केंद्र में स्थित आध्यात्मिक आर्ट गैलरी का अवलोकन कराया गया। गैलरी में प्रदर्शित आध्यात्मिक चित्रों एवं ज्ञानवर्धक प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवन में नैतिक मूल्यों और दैवीय गुणों के महत्व को समझाया गया। आर्ट गैलरी का अवलोकन करने के बाद गोपाल सिंह सोलंकी ने ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था पूरे विश्व में सेवा का सराहनीय कार्य कर रही है। इसके माध्यम से मनुष्य में दैवीय गुणों का विकास होता है और उसे सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।

वहीं, पार्षद रेहाना अंसारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी काफी समय से ब्रह्माकुमारी केंद्र आने की इच्छा थी, लेकिन व्यस्तताओं के कारण पहले आना संभव नहीं हो पाया। यहां आकर उन्हें बहुत सुकून मिला। उन्होंने कहा कि यदि निःस्वार्थ प्रेम और आत्मीयता का अनुभव करना हो तो ब्रह्माकुमारी केंद्र पर अवश्य आना चाहिए।

हास्य कला से गुदगुदाया, बुराइयों को त्यागने का दिया संदेश

कार्यक्रम में अटरू वाले फूफाजी ने अपनी हास्य कला से उपस्थित सभी भाई-बहनों को खूब हंसाया और माहौल को खुशनुमा बना दिया। उनके हास्य प्रस्तुतियों ने सभी का मनोरंजन किया और कार्यक्रम में आनंद का वातावरण बनाया।

इस अवसर पर कोटा संभाग प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने सभी अतिथियों का पटका पहनाकर एवं स्लोगन भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने विजयादशमी के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि रावण केवल एक पुतला नहीं, बल्कि हमारे अंदर विद्यमान कमियों, कमजोरियों और आसुरी अवगुणों का प्रतीक है। सच्चे अर्थों में रावण दहन तभी सार्थक होगा, जब हम अपने अंदर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का संकल्प लेंगे।

उर्मिला दीदी ने कहा कि निराकार परमपिता शिव, जिन्हें हम राम के कल्याणकारी स्वरूप के रूप में भी स्मरण करते हैं, इस धरा पर ज्ञान देकर मनुष्य के भीतर दैवीय गुणों का विकास करने की प्रेरणा देते हैं। उनके ज्ञान से आत्मा अपने अंदर के विकारों को पहचानकर उन्हें दूर करने का पुरुषार्थ कर सकती है। उन्होंने सभी से ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सिखाई जाने वाली निःशुल्क राजयोग ध्यान विधि सीखने और नियमित अभ्यास करने का आह्वान किया।

अपनी कमजोरी की पर्ची डालकर किया रावण दहन

रावण दहन से पूर्व कार्यक्रम में उपस्थित सभी भाई-बहनों एवं अतिथियों ने अपनी-अपनी एक कमजोरी को पर्ची पर लिखकर रावण के पुतले में लगाए गए बॉक्स में डाला। इसके माध्यम से सभी ने अपने अंदर की बुराइयों को त्यागने और श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।

इसके बाद ब्रह्माकुमारी केंद्र की बहनों एवं अतिथियों ने मिलकर रावण दहन किया। इस अनूठी पहल के माध्यम से संदेश दिया गया कि विजयादशमी का वास्तविक उद्देश्य केवल रावण के पुतले का दहन करना नहीं, बल्कि अपने अंदर के क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह एवं अन्य विकारों को समाप्त कर प्रेम, शांति, पवित्रता और सद्भावना को जीवन में धारण करना है।

कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों को आत्मचिंतन करने तथा अपनी कमियों को दूर कर श्रेष्ठ संस्कार अपनाने की प्रेरणा दी।

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