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कोटा दशहरा मेला 2026: 3डी तकनीक से लैस 105 फीट ऊंचा रावण तैयार, 20 अक्टूबर को होगा दहन

कोटा दशहरा मेला 2026: 3डी तकनीक से लैस 105 फीट ऊंचा रावण तैयार, 20 अक्टूबर को होगा दहन

कुंभकर्ण और मेघनाद के 72-72 फीट ऊंचे पुतले भी मैदान में स्थापित, 360 डिग्री घूमेगी रावण की गर्दन, तलवारबाजी और अट्टहास रहेगा आकर्षण

कोटा, 17 अक्टूबर। कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 में विजयादशमी के अवसर पर होने वाले रावण दहन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। दशहरा मैदान में 105 फीट ऊंचे रावण के साथ 72-72 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतले स्थापित कर दिए गए हैं। 20 अक्टूबर को होने वाले रावण दहन से पहले विशालकाय पुतलों को देखने के लिए शहरवासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

महापौर अनुसुइया गोस्वामी ने बताया कि शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे से नगर निगम की टीम और निर्माण अनुभाग के अभियंताओं की देखरेख में पुतलों को खड़ा करने का कार्य शुरू किया गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद शनिवार तड़के लगभग 7 बजे तीनों पुतलों को सुरक्षित रूप से स्थापित कर दिया गया। इस कार्य में निर्माण अनुभाग की टीम के साथ करीब 45 मजदूर और अधिकारी रातभर जुटे रहे। मजबूत लोहे के स्ट्रक्चर के कारण इस बार पुतलों को स्थापित करने का कार्य अपेक्षाकृत आसानी और सुरक्षा के साथ पूरा हुआ।

भारी क्रेनों की मदद से खड़े किए गए विशालकाय पुतले

मेला अधिकारी ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि पुतलों को स्थापित करने के लिए 100 टन क्षमता की बड़ी क्रेन, एक हाइड्रा और 65 टन क्षमता वाली क्रेन का उपयोग किया गया। इस कार्य के लिए इंदौर से विशेष रूप से तीन भारी क्रेन मंगवाई गई थीं। पुतलों के लिए तैयार किए गए मजबूत लोहे के ढांचे ने स्थापना प्रक्रिया को सुरक्षित और सुचारु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3डी तकनीक से दिखेगा रावण का अट्टहास और तलवारबाजी

इस बार दशहरा मेले में रावण का पुतला तकनीक और यांत्रिक गतिविधियों के कारण खास आकर्षण का केंद्र रहेगा। दिल्ली-एनसीआर के कारीगर अनीस की देखरेख में तैयार किए गए रावण के पुतले में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। दहन से पहले रावण की गर्दन 360 डिग्री तक घूमेगी, आंखें झपकेंगी और मूंछें हिलेंगी। इसके साथ ही रावण अपने हाथ में थामी विशाल तलवार चलाता नजर आएगा और भयानक अट्टहास से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगा।

8 टन लोहा और 500 बांस से तैयार हुआ रावण का कुनबा

रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को तैयार करने में करीब ढाई महीने तक 15 से 20 कारीगरों ने मेहनत की। विशालकाय पुतलों के निर्माण में लगभग 8 टन लोहा, 500 बांस की खपच्चियां, 1,500 मीटर वेलवेट कपड़ा और तीन क्विंटल रस्सी का इस्तेमाल किया गया है। इनके अलावा जापानी कागज, रद्दी, गत्ता और अन्य विशेष सामग्री भी उपयोग में ली गई है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, पुतलों के साथ सेल्फी लेने पहुंचे लोग

रावण दहन से पहले शहरवासियों को विशालकाय पुतलों को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। शनिवार को दशहरा मैदान में स्थानीय नागरिकों और युवाओं की भीड़ जुटी। लोग 105 फीट ऊंचे रावण के पुतले को देखने और उसके साथ सेल्फी लेने पहुंचे। आयोजन को सुरक्षित बनाने के लिए दहन स्थल पर सुरक्षाकर्मियों की विशेष तैनाती की गई है।

कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और भव्य आयोजनों के लिए देशभर में पहचान रखता है। इस बार 3डी तकनीक से सुसज्जित रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतले 20 अक्टूबर को होने वाले दहन समारोह का प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

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